मैं बाबोसा का बेटा हूँ

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॥ पावन पाठ ॥

मैं बाबोसा का बेटा हूँ, बाबोसा पालनहारे है,

मंजू बाईसा की छवि में हम, श्री बाबोसा को निहारे है,

मैं बाबोसा का बेटा हूँ।

बाबोसा को हमने नही देखा,

बस छवि को दिल मे उतार लिया,

श्री बाईसा को ही हमने तो श्री बाबोसा स्वीकार किया,

बाईसा में है बाबोसा, बाबोसा के रूप में बाईसा,

भक्तो को दर्शन देते है ,बाईसा के शरीर मे बाबोसा,

मैं बाबोसा का बेटा हूँ.....

बाबोसा की वो दिव्य शक्ति, मंजू बाईसा ने पाई है,

परम् आराधिका बाईसा ने भक्तो की बिगड़ी बनाई है,

जब भक्त कोई याद करे, दिल से कोई फरियाद करे,

सुनके पुकार बाईसा पूरी उनकी हर मुराद करे,

मैं बाबोसा का बेटा हूँ.....

अपने आँचल की छैय्या में, हम बच्चो को सुलाती है,

एक माँ बनकर के बाईसा, हरपल ही प्यार लुटाती है,

दिलबर जिनके दिल मे छवि, श्री बाबोसा की रहती है,

शैलू उनको ये दुनिया, श्री मंजू बाईसा कहती है,

मैं बाबोसा का बेटा हूँ.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।