धीरे-धीरे चलो भोले बाजे है पायलिया

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

धीरे-धीरे चलो भोले बाजे है पायलिया,

पैरों में पड़ गए छाले ओ मेरे भोले बाबा॥

माथे पे भोले के चंदा बिराजे,

गंगा कहां पै छुपाई हो मेरे भोले बाबा...-2

धीरे-धीरे चलो भोले बाजे है पायलिया,

पैरों में पड़ गए छाले ओ मेरे भोले बाबा॥

गले भोले के सर्पों की माला,

डमरू बजाते आए हैं मेरे भोले बाबा....-2

धीरे-धीरे चलो भोले बाजे है पायलिया,

पैरों में पड़ गए छाले ओ मेरे भोले बाबा॥

तनु भोले के बाघमबर सोहे,

अंग भभूति रमाए हो मेरे भोले बाबा....-2

धीरे-धीरे चलो भोले बाजे है पायलिया,

पैरों में पड़ गए छाले ओ मेरे भोले बाबा॥

पैरों में भोले के घुंघरू बिराजे,

छम छम छम छम नाचे हो मेरे भोले बाबा....-2

धीरे-धीरे चलो भोले बाजे है पायलिया,

पैरों में पड़ गए छाले ओ मेरे भोले बाबा॥

संग भोले के गौरा बिराजे,

नंदी की करे सवारी हो मेरे भोले बाबा....-2

धीरे-धीरे चलो भोले बाजे है पायलिया,

पैरों में पड़ गए छाले ओ मेरे भोले बाबा॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।