तुलसी अपनी रामायण में कह गए

पारंपरिक
श्री राम भजन राम भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

तुलसी अपनी रामायण में कह गये,

राम भी आकर यहाँ दुःख सह गये॥

राम मर्यादा सिखाने आये थे,

धर्म के पथ पर चलाने आये थे,

तुलसी अपनी रामायण में कह गये,

राम भी आकर यहाँ दुःख सह गये...

प्रेम हो तो भरत जैसे भाई का,

राज चरणों में रहा रघुराई का,

जुलम केकई के भरत भी सह गये,

तुलसी अपनी रामायण में कह गये,

राम भी आकर यहाँ दुःख सह गये...

उर्मिला साक्षात् सती की शान है,

जिसकी आरती से जगत हैरान है,

लखन आकर खुद चकित हे रह गये,

तुलसी अपनी रामायण में कह गये,

राम भी आकर यहाँ दुःख सह गये...

जिंदगी दशरथ की बीती श्राप में,

प्राण त्याग दिए राम वियोग में,

तुलसी अपनी रामायण में कह गये,

राम भी आकर यहाँ दुःख सह गये...

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।