तारा से जड़ दयो चुनड़ी

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन खाटू श्याम भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

म्हांने जाबाधो ना, राधा रुक्मण नार उढ़ास्या, बाई ने चुनड़ी

या बाई कब से उडीके म्हारी बाट,तारा से जड़ दयो चुनड़ी

राधा बोली श्याम सुन्दर थारे,बहन सहोदरा एक

या कद से बहन आपकी, साँची बताओ म्हाने बाट

तारा से जड़ दयो चुनड़ी........

नरसी महतो सेठ सांवरो,करा चाकरी जाए,

नानी बाई म्हारी बाट उडीके,राधा वो तो रही बिलमाइ

तारा से जड़ दयो चुनड़ी........

राधा रुक्मण साथ चलेगी, सज धज कर भगवान,

नानी बाई को भात भरंगा,अब ना लगाओ स्वामी बार

तारा से जड़ दयो चुनड़ी........

नानी बाई के सासरे थाने, करणो पड़सी काम

देवर नणदल सास हठीली, बाक़ा करेगी सन्मान,

तारा से जड़ दयो चुनड़ी........

नरसीजी की डाबड ली का ,आपा माई और बाप

समधन को सन्मान करेगी,बाई ना हिवड़े लगाई,

तारा से जड़ दयो चुनड़ी........

सै जोड़ा सु भात भरंगा, देखे सारो संसार,

लष्मीजी की चुंदरी,नारायण के हाथ

तारा से जड़ दयो चुनड़ी........

गंगा जमुना नीर मँगवासया, केसर लयावे भगवान

बून्द बून्द में भगत छापस्या,नरसी तो लेवे थारो नाम

तारा से जड़ दयो चुनड़ी........

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।