नदिया ना पिए कभी अपना जल

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॥ पावन पाठ ॥

नदिया ना पिए कभी अपना जल, वृक्ष ना खाए कभी अपने फल ।

अपने तन का मन का धन का दूजों को दे जो दान है,

वो सच्चा इंसान, अरे इस धरती का भगवन है ॥

अगर सा जिस का अंग जले और दुनिया को मीठी स्वास दे ।

दीपक सा उसका जीवन है, जो दूजों को अपना प्रकाश दे ।

धर्म है जिस का भगवत गीता, सेवा वेद कुरान है,

वो सच्चा इंसान, अरे इस धरती का भगवन है ॥

चाहे कोई गुण गान करे, चाहे करे निंदा कोई ।

फूलों से कोई सत्कार करे, कांटे चुभो जाए कोई ।

मान और अपमान ही दोनों, जिसके लिए सामान है,

वो सच्चा इंसान, अरे इस धरती का भगवन है ॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।