मंजू बाईसा आया पाँवनिया

पारंपरिक
श्री राम भजन विविध भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

तर्ज - दुनिया चले ना श्री राम के बिना

आई कलकत्ता में शुभ घड़ियां,

श्री मंजू बाईसा आया पाँवनिया ।।

बसन्त पंचमी का आया उत्सव,

बाबोसा भगवान का जन्ममहोत्सव...-2

ढोल नगाड़े बाजे शहनाईया,

श्री मंजू बाईसा आया पाँवनिया,

आई कलकत्ता में.....

दुल्हन सी नगरी सजाई है,

राहों में पलके बिछाई है....-2

घर द्वार सजे, बांधे तोरणियाँ,

श्री मंजू बाईसा आया पाँवनिया,

आई कलकत्ता में.....

श्री मंजू बाईसा का करने दीदार,

कबसे खड़े है नर ओर नार....-2

दर्शन को तरस रही है अंखिया,

श्री मंजू बाईसा आया पाँवनिया,

आई कलकत्ता में.....

श्री बाबोसा मंडल की राखी है लाज,

प्राची गाये मंजू बाईसा आया है आज....-2

दिलबर भक्तो में छाई खुशिया,

श्री मंजू बाईसा आया पाँवनिया,

आई कलकत्ता में.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।