बंसी बजइके कहाँ छुपइयो

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

बंसी बजइके कहाँ छुपइयो,

बंसी बजइके कहाँ छुपइयो,

करती है तुमसे व्याह,

राधा कन्हैया कन्हैया,

करती है तुमसे व्याह,

राधा कन्हैया कन्हैया....

वृंदावन का मुरलीवाला,

सब कहते है नन्द गोपाला,

छुप छुप के तू ना सता,

वृंदावन का मुरलीवाला,

सब कहते है नन्द गोपाला,

छुप छप के तू ना सता,

ओ नटखट ओ रे कन्हैया,

करती है तुमसे व्याह,

राधा कन्हैया कन्हैया....

गोपियो को तू क्यों सतावे,

हांडीयो से माखन चुराए,

मटकिया फोड़े हज़ार,

गोपियो को तू क्यों सताए,

गोपियो को तू क्यों सतावे,

हांडीयो से माखन चुराए,

ओ नटखट ओ रे कन्हैया,

करती है तुमसे व्याह,

राधा कन्हैया कन्हैया....

बार बार तू ना मुरली बजावे,

अब तुम ही हो मेरा ठिकाना,

घायल जियरा हमार,

बार बार तू न मुरली बजावे,

अब तुम ही हो मेरा ठिकाना,

घायल जियरा हमार,

ओ नटखट ओ रे कन्हैया,

करती है तुमसे व्याह,

राधा कन्हैया कन्हैया,

कन्हैया कन्हैया,

करती है तुमसे व्याह,

राधा कन्हैया,

कन्हैया कन्हैया,

करती है तुमसे व्याह,

राधा कन्हैया,

ओ राधा कन्हैया,

ओ राधा कन्हैया ॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।