मुझे रंग दे ओ रंगरे चुनरिया सतरंगी

लखबीर सिंह लक्खा
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

ओ मुझे रंग दे, मुझे रंग दे,

मुझे रंग दे ओ रंगरे चुनरिया सतरंगी,

मुझे रंग दे ओ रंगरे, चुनरिया सतरंगी,

मईया को जा के उढ़ाऊँ, चुनरिया सतरंगी,

मईया को जा के उढ़ाऊँ ,चुनरिया सतरंगी,

चुनरिया सतरंगी, जय माँ …

चुनरिया सतरंगी सतरंगी …चुनरिया सतरंगी …..

मुझे रंग दे ओ रंग रे, चुनरिया सतरंगी....

एक रंग रंग दे भक्ति का.... दूजा रंग रंग दे मुक्ति का,

तीजा रंग रंग दे शक्ति का, ओओओ....

तीजा रंग रंग दे शक्ति का... तुझको क्या समझाऊँ,

अरे तुझको क्या समझाऊँ.. चुनरिया सतरंगी,

मुझे रंग दे ओ रंगरे, चुनरिया सतरंगी....

चौथा रंग बलिदान का रंग दे,

रंग पांचवां दान का रंग दे,

चौथा रंग बलिदान का रंग दे, रंग पांचवां दान का रंग दे,

छठा रंग सम्मान का रंग दे,

साथ में प्रेम मिलाऊँ, सातवा प्रेम बताऊँ,

चुनरिया सतरंगी, मुझे रंग दे ओ रंग रे, चुनरिया सतरंगी....

बाग़ बाग़ से कलियाँ लाऊँ ,मईया के चरणों में चढाउँ,

तिलक लगाउ जोत जगाऊँ, रूठी माँ को मनाउ,

मैं रूठी माँ को मनाऊं,

चुनरिया सतरंगी... मुझे रंग दे ओ रंग रे, चुनरिया सतरंगी....

चुनरिया सतरंगी जय माँ... जय माँ

चुनरिया सतरंगी....

ओ शेरावाली को जय हो, ज्योता वाली को जय हो,

अम्बे रानी को जय हो, वैष्णो रानी को जय हो,

नैना देवी को जय हो, चिंतापूर्णी को जय हो,

मईया को जय हो....

मुझे रंग दे ओ रंग रे, चुनरिया सतरंगी....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।