मन्दा नई जोगी हाये

- कुमार संजीव
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॥ पावन पाठ ॥

मन्दा नई जोगी हाये लख मै मना लिया ||

निक्की जेही गल दा पहाड़ क्यो बना लेया ||

वेख तेर वाजो गऊयाॅ ;

खादीया न चारा वे ऐ ||

पुता बाजो हुन्दा कौन माँ दा सहारा वे ||

जा केहदे मै माँ किसे होर नु बना लिया ||

तेरे नाल बैठ गला करदी सी गुडीया ||

केहडी गल्लो पा गिया ए माँ नाल दुरीया ||

छडके तलाईया जा डेरा कित्थे ला लिया ||

लोका आखे लग जोगी मेहना तैनु मारीया ||

भुल मैत्यो होई न मै सोचीया बिचारीया ||

माँ रत्नो दे प्यार नु तू पल्ला च भुला लिया ||

गायक :- कुमार संजीव

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।