कहां जाओगे भोले भंडारी

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

कहां जाओगे भोले भंडारी,

शादी हो गई हमारी तुम्हारी॥

गोरा में पर्वत का वासी,

और तुम राजा की बेटी,

कैसे जोड़ी बनेगी हमारी,

शादी हो गई हमारी तुम्हारी.....

मैंने जप तप बहुत किया था,

पति तुमको ही माना था,

जन्मों-जन्मों की जोड़ी हमारी,

शादी हो गई हमारी तुम्हारी.....

मैं भांग धतूरा खाता,

गोरा तुमको यह नहीं भाता,

यहां मिले नहीं तरकारी,

शादी हो गई हमारी तुम्हारी.....

मैं अंग भभूति रमाता,

मेरे तन पर नहीं दुशाला,

मैं कहां से लाऊं तुम्हें साड़ी,

शादी हो गई हमारी तुम्हारी.....

यह देव बड़े दुराचारी,

माने नहीं बात हमारी,

नारद की मती गई मारी,

शादी हो गई हमारी तुम्हारी.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।