सखी दोष नहीं मनमोहन का

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

सखी दोष नहीं मनमोहन का,

वह बांस बुरे जिनकी बंसी,

वह बांस बुरे जिनकी बंसी,

वह बांस बुरे जिनकी मुरली,

सखी दोष नहीं मनमोहन का......

कभी सुबह बजे कभी शाम बजे,

कभी आधी रात बजे बंसी,

बन बन के बांस कटा दीजो,

ना उपजे बांस ना बने बंसी,

सखी दोष नहीं मनमोहन का.....

वृंदावन रहना छोड़ दिया,

गोकुल भी जाना छोड़ दिया,

नहीं पीछा छोड़ा बंसी ने,

बरसाने आए बजी बंसी,

सखी दोष नहीं मनमोहन का.....

मैं उनकी छवि पर वारी हूं,

जिन होठों की है यह बंसी,

सखी दोष नहीं राधा प्यारी का,

उनके हृदय में बसी बंसी,

सखी दोष नहीं मनमोहन का....

बंसी सब शुरू को साधे हैं,

पर एक ही धुन पर बाजे है,

सखी हाल ना पूछो मोहन का,

सब कुछ ही राधे-राधे है,

सखी दोष नहीं मनमोहन का.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।