लंकापति रावण पिया चुराई तूने

पारंपरिक
श्री राम भजन राम भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

लंकापति रावण पिया चुराई तूने हरि की सिया,

हाय हाय तूने यह क्या किया चुराई तूने हरि की सिया,

लंकापति रावण पिया चुराई....

जिस दिन से तुम सीता लाए,

काले बादल लंका पर छाए,

मेरा उस दिन से धड़के जिया,

चुराई तूने हर की सिया...

मामा मारीच का लिया सहारा,

जोगी का तूने भेष बनाया,

जग जननी को धोखा दिया,

चुराई तूने हर की सिया.....

लौटा दो तुम जनक दुलारी,

इतनी मानो बात हमारी,

तूने जन्मों का बदला लिया,

चुराई तूने हर की सिया.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।