मैं तो बगिया में बो आई भांग की कली

पारंपरिक
श्री गणेश भजन शिव भजन ganesh
॥ पावन पाठ ॥

शिव शंकर अमली, भोले बाबा अमली,

मैं तो बगिया में बो आई भांग की कली....

कहां से आई गोरा माता कहां से गणेश,

कहां से आए भोले बाबा जोगिया का भेष,

शिव शंकर अमली.....

पूरब से आई गोरा माता पश्चिम से गणेश,

उत्तर से आए भोले बाबा जोगिया का भेष,

शिव शंकर अमली....

काहे पे आई गोरा माता काहे पर गणेश,

काहे पर आए भोले बाबा जोगिया का भेष,

शिव शंकर अमली....

शेर सवारी गोरा माता मूषक पे गणेश,

बैल सवारी भोले बाबा जोगिया का भेष,

शिव शंकर अमली....

कहां पहने गोरा माता कहां पहने गणेश,

कहां पहने भोले बाबा जोगिया का भेष,

शिव शंकर अमली....

साड़ी पहने गोरा माता लंगोटा गणेश,

बाघमबर पहने भोले बाबा जोगिया का भेष,

शिव शंकर अमली....

क्या खाये गोरा माता क्या खाये गणेश,

क्या खाये भोले बाबा जोगिया का भेष,

शिव शंकर अमली.....

हलवा खाये गोरा माता मोदक गणेश,

भांग धतूरा भोले बाबा जोगिया का भेष,

शिव शंकर अमली.....

क्या वर देवे गोरा माता क्या वर दे गणेश,

क्या वर देवे भोले बाबा जोगिया का भेष,

शिव शंकर अमली.....

सुहाग देवे गोरा माता सद्बुद्धि गणेश,

अन्न धन देवे भोले बाबा जोगिया का भेष,

शिव शंकर अमली.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।