दुःख कौन हरे बिन तेरे

पारंपरिक
श्री राम भजन राम भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

दुख कौन हरे बिन तेरे,

रघुबीर कृपालू मेरे ।

जब से संसार में आया,

ममता में रहा भुलाया,

मद काम क्रोध सब घेरे ।

रघुबर कृपालू मेरे ।

दुख कौन हरे बिन तेरे.......

हरि भजन न मो को भाया,

नहिं प्रेम चरन रघुराया,

अंत: में छाए अंधेरे ।

रघुबीर कृपालू मेरे ।

दुख कौन हरे बिन तेरे.......

तन धोया मन नहिं धोया,

यह जीवन व्यर्थ बिगोया,

छूटे न भ्रमण के फेरे ।

रघुबीर कृपालू मेरे ।

दुख कौन हरे बिन तेरे.......

प्रभु अंत समय आया जब,

तेरि याद प्रभू आई तब,

'ब्रह्मेश्वर' शरन है तेरे ।

रघुबीर कृपालू मेरे ।

दुख कौन हरे बिन तेरे.......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।