बहुत किये उपकार गुरुजी

पारंपरिक
माँ गंगा भजन गुरुदेव भजन ganga
॥ पावन पाठ ॥

बहुत किये उपकार गुरुजी,

त्याग साधना चक्र पे रख कर,जीवन दिया है संवार गुरुजी।।

मैं जड़ था निष्प्राण ज्ञान बिन, व्यर्थ गँवाये पल पल छिन छिन।

आप मिले यूँ प्यासे मन ने, पाली अमृत धार गुरुजी।।

ग्रीष्म मास की शीतल छाया, जैसे शरद में ताप जलाया।

किया हृदय को मम आनंदित, दे चरणों का प्यार गुरुजी।।

ज्ञान गंगा में धूल गई काया, मलिन मोह और धूल गई माया।

है 'अनुरोध' बरसता यूँ ही, रहे तुम्हारा प्यार गुरु जी।।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।