होली खेले मसाने में

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

होली खेले मसाने में,

होली खेले मसाने में,

होली खेले मसाने में,

होली खेले मसाने में,

कशी में खेले,

घाट में खेले,

होली खेले मसाने में...

तन में भष्म लगाए शंकर,

वेश बड़ा अभंग है ….2

तन में भष्म लगाए शंकर,

वेश बड़ा अभंग है ….2

माथे पर चंद्रमा विराजे,

जाता में सोहे गंगा है,

खोल दिया है नयन तीसरा,

खान देव को जलवे …

होली खेले मसाने में,

होली खेले मसाने में,

होली खेले मसाने में,

होली खेले मसाने में,

अरे नाथ से खेले,

अरे राख से खेले,

अरे भष्म से खेले,

कोई भभूत से खेले,

अरे रेत से खेले,

अरे प्रेत से खेले,

अरे हम से खेले,

अरे रंग से खेले,

अरे हम से खेले,

अरे रंग से खेले,

अरे हम से खेले,

अरे रंग से खेले,

जय हो जय हो जय हो जय हो,

जय हो जय हो जय हो जय हो,

भंगिया पीबे भोला शंकर,

धतूरा तो ये खावे,

भंगिया पीबे धतूरा,

तो ये खावे

चौसठ योगिनी नाचे गावे,

डैमडम डम डमरू बजावे,

मसान से राख से खेले होली,

धूम माचवे मशान में,

होली खेले मसाने में,

होली खेले मसाने में,

होली खेले मसाने में,

होली खेले मसाने में,

भूत प्रेत परिवार नाचे,

गोजर बिछु कीर रे,

जब हलचल पीये बाबा,

मन में रखे पीरा रे ..2

गालव में मुंड माल लपेटे,

भोटवान संगे मशान में,

होली खेले मसाने में,

होली खेले मसाने में,

होली खेले मसाने में,

होली खेले मसाने में,

होली खेले मसाने में,

होली खेले मसाने में,

होली खेले मसाने में,

होली खेले मसाने में....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।