भजन हरि का करले अभिमानी

पारंपरिक
श्री राम भजन राम भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

भजन हरि का करले अभिमानी।

तेरी दो दिन की ज़िंदगानी।।

मोह माया में ऐसा अटका,

छोड़ के भव बंधन का खटका।

नर तन का न लाभ उठाया।

बीती जाए जवानी ।।

भजन हरि का करले अभिमानी।

तेरी दो दिन की ज़िंदगानी।।

गर्भ में हरि की शर्त कबूला,

बाहर आके सब कुछ भूला।

धरम करम को छोड़ के बंदे

करता रहा शैतानी।।

भजन हरि का करले अभिमानी।

तेरी दो दिन की ज़िंदगानी।।

सुंदर तन का मान किया रे,

तनिक न हरि का ध्यान किया रे।

"राजेन्द्र"तेरी सुंदर काया

माटी में मिल जानी।।

भजन हरि का करले अभिमानी।

तेरी दो दिन की ज़िंदगानी।।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।