तेरे नाल गुरुजी रैनगे

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॥ पावन पाठ ॥

जद ज़िन्दगी विच घोर हनेरे पैणगे,

तेरे नाल गुरुजी रैणगे-4

जद संगी साथी सारे ही छड देंणगे,

तेरे नाल गुरुजी रैणगे-4

दिल दी झूठी दुनिया सारी,

कम किसे नई औना,

हथ छड देणा सबना ने ,

किसे नई अपना बनौना,

जद मतलब दे सब संगी साथी,

तैनू धोखे देणगे,

तेरे नाल गुरुजी रैणगे......

लोड़ पवेगी जद वी तैनू,

कोई न तेरे वल आवेगा,

तेरी सुनके पिच्छो तेरी,

हँसी ओ खुल के उडावेगा,

जद रिश्ते नाते सारे जग दे,

तैनू झूठा कहेंणगे

तेरे नाल गुरुजी रैणगे....

मन लै बन्देया,गल पते दी,

'नितिन'दा ऐहो कहना,

ज़िन्दगी दा सच एहो ई ऐ,

एहो ई ऐ रैणा,

जद ज़िन्दगी दी राह विच रोड़े,

तेरे अग्गे आनगे,

तेरे नाल गुरुजी रैणगे......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।