हे कान्हा मोहे, बहुत सतावत तोरी अखियां

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

हे कान्हा मोहे, बहुत सतावत तोरी अखियां

हे कान्हा मोहे, बहुत सतावत तोरी अखियां

चहुँ दिस में कहूँ ठौर नाही मोहे , मोरे पीछे पीछे आवत तोरी अखियां,

हे कान्हा मोहे, बहुत सतावत तोरी अखियां II

मेरो मन मंदिर में ऐसो बसो है , मोहे हर पल लुभावत तोरी अखियां,

हे कान्हा मोहे, बहुत सतावत तोरी अखियां II

त्रिभुवन में कोई ऐसो नाही, जैसो तीर चलावत तोरी अखियां,

हे कान्हा मोहे, बहुत सतावत तोरी अखियां II

भवसागर में भटक रहा हूं, काहे नाही पार लगावत तोरी अखियां,

हे कान्हा मोहे, बहुत सतावत तोरी अखियांI

भजन रचना : ज्योति नारायण पाठक

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।