काशी के वासी है अविनाशी

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

हर हर हर हर भोले,

काशी के वासी है अविनाशी,

दुःख भंगन सुख करता,

काशी के वासी है अविनाशी,

दुःख भंगन सुख करता,

विश्य धर रे शम्भू परनेश्वर अलख निरंजन करता,

दया के द्रिष्टि रखना हम पर,

हे भुतेश्वर बाबा.....

हर हर हर हर भोले,

विषयो से दूर हो तुम रिश्ता समेटे हुए,

माया का छोड़ हो तुम सर्प लपेटे हुए,

हर हर भोले हर हर भोले,

विषयो से दूर हो तुम रिश्ता समेटे हुए,

माया का छोड़ हो तुम सर्प लपेटे हुए,

आखो में है तप तेरे सर पे गंगा साजे है,

कानो में है कुण्डल और गले पे मुंड विराजे है,

आखो में है तप तेरे सर पे गंगा साजे है,

कानो में है कुण्डल और गलेपे मुंड विराजे है,

काशी के वासी है अविनाशी,

दुःख भंगन सुख करता,

विश्य धर रे शम्भू परनेश्वर अलख निरंजन करता,

दया के द्रिष्टि रखना हम पर,

हे भुतेश्वर बाबा.....

देवो में महादेव तुम भोले बाबा ज्ञानी हो,

भक्तो का कल्याण करते बकङ बाबा दानी हो,

देवो में महादेव तुम भोले बाबा ज्ञानी हो,

भक्तो का कल्याण करते बकङ बाबा दानी हो,

भांग धतूरा बड़े चाव से जो तुजको चढ़ाते है,

तेरी शरण में जोभी आते दुःख सरे मिट जाते है,

भांग धतूरा बड़े चाव से जो तुजको चढ़ाते है,

तेरी शरण में जोभी आते दुःख सरे मिट जाते है,

काशी के वासी है अविनाशी,

दुःख भंगन सुख करता,

विश्य धर रे शम्भू परनेश्वर अलख निरंजन करता,

दया के द्रिष्टि रखना हम पर,

हे भुतेश्वर बाबा.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।