मैं होली कैसे खेलू री

संत सूरदास
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

मैं होली कैसे खेलू री या सांवरिया के संग रंग में...

कोरे कोरे कलश मंगाए उनमें घोरा रंग,

भर पिचकारी ऐसी मारी चोली हो गई तंग,

रंग में होली कैसे खेलूं री...

नैनन सूरमा दांतन मिस्सी रंग होत बदरंग,

मशक गुलाल मले मुख ऊपर रहे कृष्ण को संग,

रंग में होली कैसे खेलू री....

तबला बाजे सारंगी बाजे और बाजे मृदंग,

कान्हा जी की बांसुरी बाजे राधा जी के संग,

रंग में होली कैसे खेलूं री....

चुनरी भीगोई लहंगा भिगोयो छूटो किनारी रंग,

सूरदास कहै कहां भिगोए कारी कमरी अंग,

रंग में होली कैसे खेलूं री.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।