धुला लों पांव राघव जी

पारंपरिक
श्री राम भजन राम भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

धुला लों पांव राघव जी अगर जो पार जाना है,

अगर जो पार जाना है अगर जो पार जाना है,

धूला लो पांव राघव जी.....

पार करते हो सब जग को नाव का तो बहाना है,

तुम्हारे चरणों की धूलि सुना है जादू करती है,

जो छू जाए अगर पत्थर तो सुंदर नारी बनती है,

जो पत्थर नारी बन जाए तो काठ का क्या ठिकाना है,

धूला लो पांव राघव जी....

हमारी नाव ही परिवार का अंतिम सहारा है,

बिना इसके ओ राघव जी कहां मेरा गुजारा है,

ये नैया जिंदगी मेरी ना कोई भी ठिकाना है,

धूला लो पाव राघव जी....

आएंगे मेरे राघवजी मेरे दिल में तमन्ना थी,

करें उद्धार मेरा भी लगन दिल में लगाई थी,

सफल जीवन करूं अपना ना अब कोई बहाना है,

धूला लो पाव राघव जी.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।