तेनु वेख वेख आँख मेरी रेजड़ी ना

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॥ पावन पाठ ॥

तेनु वेख वेख अख मेरी रजदी न, चीज दुनिया मेनू कोई जचदी न

तेनु वेख वेख अख मेरी रजदी न, चीज दुनिया मेनू कोई जचदी न

तेनु वेख वेख अख मेरी रजदी न

तेरे प्यार विच भूल जा जहान मैं, तेथो सब कुछ करा कुर्बान मैं ........॥

तेरी रहमत्ता दो होंदी हां हैंरान मैं, तेथो वारी सब दुन्यिया दी शान मैं ......॥

रूह मेरी होर किसे पासे तकदी न...२ तेनु वेख वेख अख मेरी राजदी न

तेनु वेख वेख अख मेरी रजदी न,

बस इक्को तेरी दीद ही मैं लोचदी, तेरा बिना होर कुज वी न सोचदी ...॥

मेनू कोई परवा न हूण मोंत, नाल तू हैं जद गल की हैं औख......॥

मेरी जान हून तेरे बिना बच्दी न, तेनु वेख वेख अख मेरी राजदी न

तेनु वेख वेख अख मेरी रजदी न,

लईया तेरे नाल तोढ़ ही निभावा गी, कित्ते वादे मैं ता सब ही पुगवा गी ....॥

जग रूसे भावें तेनु ही मन्नावा गी, तेरा दर छड्ड किथे वी ना जवागी ...॥

युगा युग्गा दो प्रीत कोई अज दी न, तेनु वेख वेख अख मेरी राजदी न,

तेनु वेख वेख अख मेरी रजदी न,

तू मस्सीहा बन दुनिया दे आ गया, हर दिल विच बस तू समां गया ....॥

तेरी महिमा जेडा इक वारी गा गया वो रब दा दीदार फिर पा गया....॥

होर हस्ती कोई तेरा जाई लबदी ना तेनु वेख वेख अख मेरी राजदी न,

तेनु वेख वेख अख मेरी रजदी न, चीज दुनिया मेनू कोई जचदी न

तेनु वेख वेख अख मेरी रजदी न, चीज दुनिया मेनू कोई जचदी न

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।