जीवन की सांसें कब रुक जाए हार कर

पारंपरिक
श्री राम भजन विविध भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

जीवन की सांसें कब रुक जाए हार कर ।

रखना जतन से प्यारे इनको संवारकर।।

जीवन की सांसें कब रुक जाए हार कर ।

रखना जतन से प्यारे इनको संवारकर।।

आंखों में हरी छवि कानों से ज्ञान सुन।

सुबह सबेरे गाओ सिर्फ एक रामधुन।।

हर काम करना प्यारे प्रभु को पुकार कर।।

रखना जतन से इनको संवारकर।।

जीवन की सांसें कब रुक जाए हार कर ।

रखना जतन से इनको संवारकर।।

माथा श्री चरणों में हाथों से दान कर।

महल अटारी रूप रंग का न मान कर

जीव्हा से राम नाम हर पल उचार कर।।

रखना जतन से प्यारे इनको संवारकर।।

जीवन की सांसें कब रुक जाए हार कर ।

रखना जतन से इनको संवारकर।।

बचपन जवानी बीती अब तो भजन कर।

सत्संग गीता पाठ कोई जतन कर।।

हिरदय में राजेंद्र राम नाम धार कर।।

रखना जतन से प्यारे इनको संवारकर।।

जीवन की सांसें कब रुक जाए हार कर ।

रखना जतन से इनको संवारकर।।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।