जगदंबा के दीवानों को दर्शन चाहिए

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

जगदंबा के दीवानों को दर्शन चाहिए,

हमें मां तेरी एक झलक चाहिए, झलक चाहिए॥

दया और ममता की मूरत है तू, हां मूरत है तू,

तुझे क्या पता कितनी सुंदर है तू, कितनी सुंदर है तू,

दुआओं के जैसा है मन मां तेरा,

हमें मां तेरे जैसा मन चाहिए, हां मन चाहिए,

जगदंबा के दीवानों को.....

तेरा रूप सबसे सुहाना लगे सुहाना लगे,

बिना भक्ति के जी कहीं ना लगे कहीं ना लगे,

मां भक्ति में तेरे हम डूबे रहें,

हमें मां तुमसे ऐसा बर चाहिए हां वर चाहिए,

जगदंबा के दीवानों को....

कई देत्त तुमने पछाड़े हैं मां पछाड़े हैं मां,

तेरा शेर रण में दहाड़े है मां दहाड़े है मां,

तू काली नवदुर्गा टू ज्वाला है मां,

हमें मार तेरी ही शरण चाहिए शरण चाहिए,

जगदंबा के दीवानों को....

तू पर्वत तू नदिया तू धरती है मां तू धरती है मां,

तू पाताल अंबर सितारों में मां सितारों में मां,

तेरी इन भुजाओं में शक्ति है मां,

हमें इन भुजाओं का बल चाहिए,

जगदंबा के दीवानों को....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।