वृन्दावन में रस की धार

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

वृन्दावन में रस की धार,

सखी री बरस रही,

मैं तो कर सोलह श्रृंगार,

सखी री तरस रही,

वृंदावन में रस की धार,

सखी री बरस रही....

शरद चंद्र की अमृत किरणे,

भूमण्डल पर लगी बिखरने,

चांदनी बन छाई बहार,

चहुँ ओर बरस रही,

वृंदावन में रस की धार,

सखी री बरस रही....

तान सुरीली श्याम बजाई,

मधुबन मिल गोपी सब आई,

जीवन होगा साकार,

सखी री हरष रही,

वृंदावन में रस की धार,

सखी री बरस रही....

अमर प्रेम भरे रसिक बिहारी,

पागल की हरिदास दुलारी,

‘गोपाली’ जीवन आधार,

करुण रस बरस रही,

वृंदावन में रस की धार,

सखी री बरस रही.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।