शेरावाली के भवन में छम छम नाचे लांगुरिया

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

शेरावाली के भवन में छम छम नाचे लांगुरिया,

नाचे लांगुरिया छम छम नाचे लांगुरिया,

शेरावाली के भवन में छम छम नाचे लांगुरिया॥

शीश मैया के मुकुट विराजे अंग मैया के साड़ी,

पर्वत ऊपर राज करत है मैया शेरावाली,

शेरावाली के भवन में छम छम नाचे लांगुरिया॥

सात दीप नौ खंड में हो रही जय जयकार,

मैया मेरी अजब निराली भेद ना कोई पाए,

शेरावाली के भवन में छम छम नाचे लांगुरिया॥

मैया केवल आपका रहा भरोसा मोए,

छवि दिखला दो अपनी मेरी आशा पूर्ण होए,

शेरावाली के भवन में छम छम नाचे लांगुरिया॥

कौन तिथि देवी पूजे कौन तिथि भगवान,

कौन अतिथि शिवजी पूजे कौन तिथि हनुमान,

शेरावाली के भवन में छम छम नाचे लांगुरिया॥

साते को देवी पूजे नवमी को भगवान,

तेरस को शिव जी पूजा पूरण को हनुमान,

शेरावाली के भवन में छम छम नाचे लांगुरिया॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।