भाव के भूखे है भगवान

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

भाव बिन मिले नहीं भगवान,

भाव के भूखे हैं भगवान,

ओ भगवान को जपने वाले, दिल से कर ले ध्यान,

भाव के भूखे हैं भगवान,

भाव बिन मिले नहीं भगवान....

झूठे फल शबरी के खाए,

राम ने रुचि रुचि भोग लगाएं,

जो ढूंढे उसको मिल जाए, कहते वेद पुराण,

आप मिले नहीं भगवान,

भाव के भूखे हैं भगवान,

भाव बिन मिले नहीं भगवान....

दुर्योधन की छोड़ी मेवा,

भा गई विदुरानी की सेवा,

जो ढूंढे उसको मिल जाए कहता, संत समाज,

भाव के भूखे हैं भगवान,

भाव बिन मिले नहीं भगवान....

ध्रुव पहलाद सुदामा मीरा,

नरसी भगत की मिट गई पीड़ा,

श्रद्धा और समर्पण से ही, रीझे करुणानिधान,

भाव के भूखे हैं भगवान,

भाव बिन मिले नहीं भगवान....

भाव बिना ना भक्ति सुहावे,

बिना गुरु के ज्ञान ना आवे,

राहें ना पावे रसिक बावरे ओ मूरख नादान,

भाव के भूखे हैं भगवान,

भाव बिन मिले नहीं भगवान....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।