मैया मेरी दूर कैसे मैं दर्शन पाऊं

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

मैया मेरी दूर कैसे मैं दर्शन पाऊं,

शेरावाली बड़ी दूर कैसे मैं दर्शन पाऊं,

ऊंचे पहाड़ों पर डेरा बना मंदिर तेरा,

आने में मजबूर कैसे मैं दर्शन पाऊं,

शेरावाली बड़ी दूर....

पैरों में पड़ गए छाले जान के लाले,

चढ़ने में मजबूर कैसे मैं दर्शन पाऊं,

शेरावाली बड़ी दूर....

मैया दे दे खुशियां सारी छाई हो हरियाली,

पूरे करो अरमान कैसे मैं दर्शन पाऊं,

शेरावाली बड़ी दूर....

मुझे दे गोदी में छैया शारदा मैया,

रहे अमर सुन दूर कैसे मैं दर्शन पाऊं,

शेरावाली बड़ी दूर....

तेरे दर पर जो भी आता खाली नहीं जाता,

जोली भर्ती भरपूर कैसे मैं दर्शन पाऊं,

शेरावाली बड़ी दूर....

तेरी जग में महिमा छाई कालका माई,

चेहरे पर जलके नूर कैसे मैं दर्शन पाऊं,

शेरावाली बड़ी दूर....

भक्तों को दर पर बुला लो मां विपता टारो,

देना दर्शन भरपूर कैसे मैं दर्शन पाऊं,

शेरावाली बड़ी दूर....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।