नंदलाला हे गोपाला दुखियों कि सुनो पुकार रे

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

नंदलाला हे गोपाला दुखियों कि सुनो पुकार रे,

लाज बचाओ सांवरिया....

दुशाशन मेरा चीर उतारण ठाडयो है गिरिधारी,

ये तो सारे बलधारी है मैं अबला बिचारी,

प्रभू जी में अबला बिचारी..

ब्रिजलाला है रखवाला मेरी नाव लगा दे पार रे,

लाज बचाओ सांवरिया.....

मैं हू दासी जन्म जन्म कि कहा कहू करतारी,

यहा हसी होवे तो समझो मेरी नाही तुम्हारी,

प्रभुजी मेरी नाही तुम्हारी..

जगपाला हो देख लाला मोहें काय करू दिखाय रे,

लाज बचाओ सांवरिया....

पाचो पती निचासीर डोले बैठे दिन दुहारे,

दुशाशन मेरा चीर उतारण ठाडयो नंद दुलारे,

प्रभुजी ठाडयो नंद दुलारे..

प्रतिपाला कर उजियाला अब ना कर अत्याचार रे,

लाज बचाओ सांवरिया....

द्रौपदी कि सून टेर तुरंत ही प्रगटे कृष्ण मुरारी,

चीर बढाई दियो एक पलक में राम शरण बलिहारी,

प्रभुजी राम शरण बलिहारी..

मतवाला दुःख हरडाला तेरी लीला अपरंपार रे....

लाज बचाओ सांवरिया....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।