किस्मत को मेरी खोलो

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॥ पावन पाठ ॥

किस्मत को मेरी खोलो,

मैं दास हूँ तुम्हारा,

दीनो के नाथ हो तुम,

बड़ा नाम है तुम्हारा,

किस्मत को मेरी खोलों,

मैं दास हूँ तुम्हारा....

तेरा ही हूँ दीवाना,

तेरी याद में भटकता,

तेरे ही नाम से ये,

दिल भी मेरा धड़कता,

अपना मुझे बना लो,

मैं दास हूँ तुम्हारा,

किस्मत को मेरी खोलों,

मैं दास हूँ तुम्हारा....

नैनो से मेरे बाबा,

झरना बरस रहा है,

नजदीक में जो आए,

सपना सा लग रहा है,

बिगड़ी मेरी बना दो,

मैं दास हूँ तुम्हारा,

किस्मत को मेरी खोलों,

मैं दास हूँ तुम्हारा.....

लिखता है पुष्प बाबा,

सेवक तेरा तिवारी,

राकेश तेरा गाए,

ये है कृपा तुम्हारी,

अपने ही रंग रंगा दो,

मैं दास हूँ तुम्हारा,

किस्मत को मेरी खोलों,

मैं दास हूँ तुम्हारा.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।