वनवासी हुए राम अपने भगत के कारण

पारंपरिक
श्री राम भजन राम भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

वनवासी हुए राम अपने भगत के कारण,

अपने भगत के कारण भगत के कारण,

वनवासी हुए राम....

पहला मिलन केवट से मिलन केवट से,

केवट धोए दोनों पांव अपने भगत के कारण,

वनवासी हुए राम....

दूसरा मिलन भए शबरी मिलन भए शबरी,

दर्शन दिए आए अपने भगत के कारण,

वनवासी हुए राम....

तीसरा मिलन भए जटायु मिलन भए जटायु,

पहुंचाए निजधाम अपने भगत के कारण,

वनवासी हुए राम....

चौथा मिलन भए विभीषण मिलन भए विभीषण,

बन गए बिगड़े काम अपने भगत के कारण,

वनवासी हुए राम....

पांचवा मिलन भए रावण मिलन भए रावण,

अंत पुकारा रावण राम अपने भगत के कारण,

वनवासी हुए राम....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।