कमाले चाहे हीरे मोती

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॥ पावन पाठ ॥

कमाले चाहे नर हीरे मोती, कफन में जेब नहीं होती,

कफन में जेब नहीं होती, कफन में जेब नहीं होती,

कमाले चाहे नर हीरे मोती, कफन में जेब नहीं होती.....

चाहे तू खाले पूड़ी कचौड़ी,

चाहे तू खाले सूखी रोटी,

भूख सब एक जैसी होती, कफन में जेब नहीं होती.....

चाहे ओढ़ ले साल दुशाला,

चाहे ओढ़ ली फटो चादरा,

नींद सब एक जैसी होती, कफन में जेब नहीं होती.....

चाहे तू बन जा भाट भिखारी,

चाहे तू बन अंबानी अडानी,

इज्जत एक जैसी होती, कफन में जेब नहीं होती....

चाहे बैठ जा घोड़ा गाड़ी,

चाहे बनाले महल अटारी,

अंत डोली सबकी एक जैसी, कफन में जेब नहीं होती.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।