दर पे आके तेरे साईं बाबा

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॥ पावन पाठ ॥

दर पे आके तेरे साईं बाबा,

कुछ सुनाने को दिल चाहता है,

ना जुदा अपने चरणों से करना,

सर झुकाने को दिल चाहता है.....

मैं जहाँ भी गया मैंने देखा,

लोग हैं स्वारथी इस जहाँ में,

बात है क़ुछ दबी सी लबों पे,

वो बताने को दिल चाहता है.....

थाम लो बाबा दामन हमारा,

अब मुझे बस है तेरा सहारा,

मोह माया भरे झूठे जग से,

मन हटाने को दिल चाहता है.....

बस यही एक कृपा मुझपे कर दो,

हाथ हो तेरा सर पे हमारे,

भक्ति रस में तुम्हारे ओ बाबा,

डूब जाने को दिल चाहता है.....

नाम का जाम मुझको पिला दो,

बस यही आपसे माँगते हैं,

‘परशुराम’ छबि बाबा की मन में,

बस बसाने को दिल चाहता है.....

दर पे आके तेरे साईं बाबा,

कुछ सुनाने को दिल चाहता है,

ना जुदा अपने चरणों से करना,

सर झुकाने को दिल चाहता है.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।