बीरा म्हारा रामदेव रे

पारंपरिक
श्री राम भजन विविध भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

बीरा मारा रामदेव ,

राणी नेतल रा भरतार,

ऐ कर ले वाणी आवजयो,

थारी बेनड करे पुकार।

अळगी गाणी परणाई वो बीरा जी,

ली नहीं साल संभाल,

जिव अमुजे उण्डी ओरिया में,

अठे पड़े रे काल पर काल,

ओ बीरा रामदेव रे,

बाई ने एकर लेवण आ,

अळगो बाई रो सांसरो रे,

ओ बीरा रे माता मिलन रो चाह....

बेटी ने तो नुचु रेवे, बूढ़ा मायर बाप,

अलगो लगन, लिखायो रे जोशी जी,

थाने खायो नहीं कालो सांप,

ओ बीरा रामदेव रे,

बाई ने एकर लेवण आ,

अळगो बाई रो सांसरो रे,

ओ बीरा रे माता मिलन रो चाह....

सांसु जितरे सांसरो रे,

बीरा माता जिटरे पीर,

जद रे भोजाया घर आवसी रे,

मारो मनडो ना माने पीर,

ओ बीरा रामदेव रे,

बाई ने एकर लेवण आ,

अळगो बाई रो सांसरो रे,

ओ बीरा रे माता मिलन रो चाह.....

एकर तो बीरा माने ने बता दो,

पिहरिया रा रुख,

ना जाणु कद होवसी रे,

बीरा रूणिचा में रुख,

ओ बीरा रामदेव रे,

बाई ने एकर लेवण आ,

अळगो बाई रो सांसरो रे,

ओ बीरा रे माता मिलन रो चाह....

ओलु सुगना बेन री रे,

बीरा कथ गावै पन्ना लाल,

अब मत बिलखे सुगना बेनड़ी,

थाने रत्नो लेवन आव,

ओ बीरा रामदेव रे,

बाई ने एकर लेवण आ,

अळगो बाई रो सांसरो रे,

ओ बीरा रे माता मिलन रो चाह.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।