कंचन कांच का बनिया रे

पारंपरिक
हनुमान जी भजन हनुमान भजन hanuman
॥ पावन पाठ ॥

( ऊंची पेड़ी मात की, चढ्यो ना उतरियो जाय,

कहिजो मारी मात से, हाथ पकड़ ले जाय। )

कंचन कांच का बणिया रे हनुमान,

चांदी की म्हारी चौथ माता....

म्हारा ससुराजी ढोके जे हनुमान,

सासुजी म्हारी चौथ माता।

कंचन कांच का बणिया रे हनुमान,

चांदी की म्हारी चौथ माता....

म्हारा जेठ जी ढोके जे हनुमान,

जेठाणी म्हारी चौथ माता।

कंचन कांच का बणिया रे हनुमान,

चांदी की म्हारी चौथ माता....

कामखेड़ा में पुजाया हनुमान,

बरवाड़े म्हारी चौथ माता।

कंचन कांच का बणिया रे हनुमान,

चांदी की म्हारी चौथ माता.....

म्हारा काका जी ढोके जे हनुमान,

काकीजी म्हारी चौथ माता।

कंचन कांच का बणिया रे हनुमान,

चांदी की म्हारी चौथ माता.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।