ये प्रभु का ही वरदान है

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॥ पावन पाठ ॥

ये प्रभु का ही वरदान है,

माँ पिता मेरे भगवान है,

सारा जीवन है अर्पण तुम्हे,

आप में ही मेरे प्राण है,

ये प्रभू का ही वरदान है....

जब ये आंखे खुली,

माँ का चेहरा दिखा,

उसकी छाया में ही,

मैने चलना सिखा,

जब कभी भी प्रभु,

के दर्शन किए,

मेरी माँ का ही चेहरा,

उनमे दिखा,

कोई अच्छे किए है करम,

इस घर में मिला जो जनम,

छाया होगी ना तेरी जुदा,

हो अमावस हो चाहे पूनम,

ये प्रभू का ही वरदान है....

वो पिता है मेरे,

ऋण जिनका अपार,

हँसते हँसते लिया,

सारे कष्टों का भार,

पुंजी उनकी ही है,

मेहनत और लगन,

ज्ञान हमको दिया,

निखरा सारा जीवन,

माँ पिता ऐसे जिनको मिले,

वो तो सबसे सुखी प्राणी है,

धन की कोई जरुरत नहीं,

वो तो ऐसे ही धनवान है,

ये प्रभू का ही वरदान है.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।