नाकोंडा में भक्तो की टोली चली

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॥ पावन पाठ ॥

तर्ज - कोई परदेसी मेरा दिल ले गया

भक्ति की देखो एक ज्योत जली,

नाकोंडा में भक्तो की टोली चली,

भक्ति की देखो एक....

गाँव गाँव ओर शहर शहर से,

भक्त आज निकले - अपने घर से,

गली मोहल्लो से झूमती चली,

नाकोंडा में भक्तो की टोली चली,

भक्ति की देखो एक....

भक्तो की टोली चलती ही जाती,

करते हुए दादा - भैरव की भक्ति,

भक्ति की शक्ति जो इनको मिली,

नाकोंडा में भक्तो की टोली चली,

भक्ति की देखो एक....

मेवानगर पहुँचे भक्त चलकर,

मस्ती में झूमे उठे - दादा को देखकर,

दादा के चरणों मे शांति मिली,

नाकोंडा में भक्तो की टोली चली,

भक्ति की देखो एक....

टुकलिया परिवार आया नाकोंडा दरबार में,

भैरव देव जैसा दानी - देखा न संसार मे,

जाग्रति कहे " दिलबर " किस्मत खुली,

नाकोंडा में भक्तो की टोली चली,

भक्ति की देखो एक....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।