गुरु ज्ञान की ज्योत जगाय गयो

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॥ पावन पाठ ॥

( मां केशर के लाल को कोटि कोटि प्रणाम,

क्तो रा दुखड़ा दूर करे श्री राजेन्द्र सूरी है नाम। )

गुरु ज्ञान की ज्योत जगाय गयो,

भक्ति रो मार्ग बताया गयो,

श्री राजेन्द्र सूरी उपकारी,

जाने ध्यावे नर और नारी,

है..माँ केशर रा लाल, भरतपुर जन्म लियो,

है..पारख कुल ओसवाल, जग में नाम कियो,

गुरु ज्ञान की ज्योत जगाय गयो....

पोष मास की सातम प्यारी,

गुरु जन्म की खुशिया भारी,

युवाउम्र में संयम धारे,

छोड़े रिश्ते नाते सारे,

गुरु अभिधान राजेन्द्र कोष रचा,

कई ग्रन्थ रचे जग में चर्चा,

श्री राजेन्द्र सूरी उपकारी,

जाने ध्यावे नर और नारी,

है..माँ केशर रा लाल, भरतपुर जन्म लियो,

है..पारख कुल ओसवाल, जग में नाम कियो,

गुरु ज्ञान की ज्योत जगाय गयो....

साठ वर्ष संयम में गुजारे,

अस्सी वर्ष में स्वर्ग सिधारे,

जप तप संयम में रहकर,

जिन शासन काज सँवारे,

गुरु महिमा का कोई पार नही,

मेरे दादा गुरु सा " दिलबर " ओर नही,

श्री राजेन्द्र सूरी उपकारी,

जाने ध्यावे नर और नारी,

है..माँ केशर रा लाल, भरतपुर जन्म लियो,

है..पारख कुल ओसवाल, जग में नाम कियो,

गुरु ज्ञान की ज्योत जगाय गयो....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।