सतगुरु सेन बताए

पारंपरिक
विष्णु भगवान भजन गुरुदेव भजन vishnu
॥ पावन पाठ ॥

असल निज सार की भाई साधु,

सतगुरु सेन बताए,

सतगुरु सेंन बताए।।

सुरता शब्द विचार नुरत घर,

पहरा दीना,

पाँच पचीस ने मार,

अगम का मार्ग लीना,

अब जागो जागण देश में,

निर्भय गहरे रे निशान,

सात द्वीप नव खण्ड में रे,

नही शशि नही भान,

असल निज सार की भाई साधु,

सतगुरु सेंन बताए।।

अब घटा चढ़ि घनघोर,

बरसे कोई अम्रत धारा,

पीवे संत सुजान हरि का,

हरि जन प्यारा,

जन्म मरण आवे नही,

आवा गमन मिट जाय,

अटल धाम पर जा टिके रे,

संत अमर हो जाय,

असल निज सार की भाई साधु,

सतगुरु सेंन बताए।।

कैसा ये देश गुरु का,

ऐसा कहिये,

नही शशि नही भान,

वहां पर होत उजाला,

नही शशि नही भान,

उजाला घट माय,

मेहर हुई गुरुदेव की रे,

कर लिया रे बखान,

असल निज सार की भाई साधु,

सतगुरु सेंन बताए।।

सतगुरुसा सुखदास,

नवलगुरु ब्रह्म समाना,

बैठा आसन ढाल,

मुगत का देने वाला,

शरण कमल के मायने,

बोले ब्रह्म समाय,

बाहुबल तेरा टाल दी,

अगम निगम है अपार,

असल निज सार की भाई साधु,

सतगुरु सेंन बताए।।

असल निज सार की भाई साधु,

सतगुरु सेन बताए,

सतगुरु सेंन बताए।।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।