श्याम बिना क्या ये शाम सुहाए

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन खाटू श्याम भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

( शाम भयी पर श्याम ना आए

श्याम बिना क्या ये शाम सुहाए,

ये व्याकुल मन हर शाम से पूछे,

ऐ री बता क्यूँ श्याम ना आए,

शाम ने श्याम का राज बताया,

शाम ने श्याम को क्यूँ है पाया,

श्याम भी काले शाम भी काले,

यूँ मिलते है मिलने वाले। )

तूने तान ये कैसी सुनाई रे,

याद आई रे तेरी याद आई,

याद आई रे तेरी याद आई।।

मेरी इन धड़कनो में नाम तेरा बस गया,

भूले ना भुलाए तेरा रंग ऐसा चढ़ गया,

मुझे इक पल नींद ना आई रे,

मुझे इक पल नींद ना आई रे,

याद आई रे तेरी याद आई,

याद आई रे तेरी याद आई।।

इक बार आना कान्हा वादा तो निभाना,

मेरी इन धड़कनो में प्यार बसाना,

तेरी राहों में नैना बिछाई रे,

तेरी राहों में नैना बिछाई रे,

याद आई रे तेरी याद आई,

याद आई रे तेरी याद आई।।

याद की दीवानी मैं तो डोलूं वन वन में,

इक तेरी प्रीत बसी मेरे इस मन में,

तूने प्रीत ये कैसी निभाई रे,

तूने प्रीत ये कैसी निभाई रे,

याद आई रे तेरी याद आई,

याद आई रे तेरी याद आई।।

तूने तान ये कैसी सुनाई रें,

याद आई रे तेरी याद आई,

याद आई रे तेरी याद आई।।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।