जैन धर्म हमे प्राणों से भी प्यारा है

पारंपरिक
माँ गंगा भजन जैन भजन ganga
॥ पावन पाठ ॥

तर्ज – हारे हारे हारे

जैन धर्म हमे,

प्राणों से भी प्यारा है,

धर्मो में ये धर्म,

बड़ा ही न्यारा है,

अहिंसावादी, है ये पंथ हमारे,

जहाँ प्रेम की गंगा बहे,

जिनशासन मिला रे,

भाग्य हमारा खिला रे।।

तारणहार, मिले तीर्थंकर,

जंगम तीर्थ, मिले है स्थावर,

श्रमण वेश को धारण किये जो,

उपकारी ये मिले है गुरुवर,

आओ भाव से, करले वंदना,

जिनशासन मिला रे,

भाग्य हमारा खिला रे।।

दया दान और, क्षमापना,

जैनो के दिल मे ये भावना,

हो प्राणियों में, सद्दभावना,

‘दिलबर’ की है ये कामना,

जैन धर्म को करले हम नमन,

जिनशासन मिला रे,

भाग्य हमारा खिला रे।।

जैन धर्म हमे,

प्राणों से भी प्यारा है,

धर्मो में ये धर्म,

बड़ा ही न्यारा है,

अहिंसावादी, है ये पंथ हमारे,

जहाँ प्रेम की गंगा बहे,

जिनशासन मिला रे,

भाग्य हमारा खिला रे।।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।