एक सच्चे सतगुरु ज्ञान बिना

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

एक सच्चे सतगुरु ज्ञान बिना,

दुनिया में अपना कोई नहीं...

एक बात कहें बेटा मेरा है,

वह बेटा का है सब धोखा है,

बस जन्म लेन का रिश्ता है,

दुनिया में अपना कोई नहीं....

एक बहन कहे भाई मेरा है,

वह भाई कहे सब धोखा है,

बस भात लेन का रिश्ता है,

दुनिया में अपना कोई नहीं....

एक तिरीया कहे पति मेरा है,

वह पति कहे सब धोखा है,

बस बंश बढ़न का नाता है,

दुनिया में अपना कोई नहीं....

एक शिष्य कहे गुरु मेरा है,

वह गुरु कहे सब धोखा है,

बस ज्ञान लेन का नाता है,

दुनिया में अपना कोई नहीं.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।