राम भजो डर काहे को

संत सूरदास
श्री राम भजन राम भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

( सतगुरु मेरा बणिया, और में संतन की देह,

रोम रोम में बस गया, ज्यू बादल बिच मेघ। )

भजो जाको विश्वास राखजो ,

सायब भिड़ी थांको।

संता राम भजो डर काको।

श्रीयादे सिमरण ने बैठी ,

नेचो राखो धणिया को।

बलति अग्निमु बचिया उबारिया,

आव पाक ग्यो आको।

संता राम भजो डर काको।

भजो जाको ….

भक्त प्रहलाद ने पर्चो पायो ,

पायो साथ सतिया को।

ताता खम्ब से बाथ भराई ,

मेट्यो नाम पिता को।

संता राम भजो डर काको।

भजो जाको ….

दस माथा ज्याके बीस भुजा है,

रावण बण गयो बांको।

एक एक ने काट भगाया ,

पतो न राख्यो वाको।

संता राम भजो डर काको।

भजो जाको ….

गज ग्राहक लड़े जल भीतर ,

लड़त लड़त गज थाको।

गज की कूच सुनी दरगाह में,

गरुड़ छोड़कर भागो।

संता राम भजो डर काको।

भजो जाको ….

कौरव पांडवा के भारत रचियो ,

होयो मरबा को हाको।

पांडवा के भिड़ु कृष्ण चढ़ आया,

बाल न हुयो बांको।

संता राम भजो डर काको।

भजो जाको ….

भारत मे भॅवरी का अंडा,

बले काळजो मां को।

गज का घंटा टूट पड़ा है ,

बांण मोखला फांको।

संता राम भजो डर काको।

भजो जाको ….

कोरवा का भेज्या पांडव रे आया,

कोने दोष गुरां को।

तीन बात की करी थरपना ,

पेड़ लगायो आम्बा को।

संता राम भजो डर काको।

भजो जाको ….

के लख कहु के लख वर्णों ,

सारियो काज गणा को।

सूरदास की आई विनती ,

सत्य वचन मुख भाको।

संता राम भजो डर काको।

भजो जाको ….

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।