जीवन खतम हुआ तो जीने का ढंग आया

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॥ पावन पाठ ॥

जीवन खतम हुआ तो,

जीने का ढंग आया,

जब शम्मा बुझ गयी तो,

महफ़िल में रंग आया,

जीवन ख़त्म हुआ तो,

जीने का ढंग आया।।

मन की मशीनरी ने,

तब चलना ठीक सीखा,

जब इस बूढ़े तन के,

पुर्जे में जंग आया,

जीवन ख़त्म हुआ तो,

जीने का ढंग आया।।

गाड़ी चली गई तब,

घर से चला मुसाफिर,

मायूस हाथ मलता,

वापस वो रंग आया,

जीवन ख़त्म हुआ तो,

जीने का ढंग आया।।

फुर्सत के वक़्त में फिर,

सुमिरन का वक़्त आया,

उस वक़्त वक़्त माँगा,

जब वक़्त तंग आया,

जीवन ख़त्म हुआ तो,

जीने का ढंग आया।।

जीवन खतम हुआ तो,

जीने का ढंग आया,

जब शम्मा बुझ गयी तो,

महफ़िल में रंग आया,

जीवन ख़त्म हुआ तो,

जीने का ढंग आया।।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।