बँदगी दुख तमाम हरती है

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॥ पावन पाठ ॥

बँदगी दुख तमाम हरती है,

ओषधी का काम,

ओषधी का काम करती है,

बँदगी दुख तमाम हरती है।।

पीले इसे जो कोई नियम से,

जीवन मे रहे जो सँयम से,

कि जीवन मे रहे जो सदा सँयम से,

उन पर ये बहुत काम करती है,

बँदगी दुख तमाम हरती है।।

ले ले दवा तू ओ मन प्यारे,

आजा रे आजा अब तो प्रभू के द्वारे,

कि आजा रे आजा प्रभू के द्वारे,

सुबहोशाम आठो याम बँटती है,

बँदगी दुख तमाम हरती है।।

बाँटे गुरू मेरा दिन और रैना,

लेलो रे आकर जिस को भी है लेना,

कि लेलो रे आकर जिसको है लेना,

खर्चे सेभी नही ये घटती है,

बँदगी दुख तमाम हरती है।।

बँदगी दुख तमाम हरती है,

ओषधी का काम,

ओषधी का काम करती है,

बँदगी दुख तमाम हरती है।।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।