जयपुर से लाई मैं तो चुनरी रंगवाई के

लखबीर सिंह लक्खा
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

जयपुर से लाई मैं तो,

चुनरी रंगवाई के,

गोटा किनारी अपने,

हाथो लगवाई के,

मैया को ओढ़ाउंगी,

द्वारे पे जाइके।।

चंदा की किरणों से,

सूरज की लाली से,

नीले समंदर से,

वन की हरियाली से,

रंग मांगे चुनरी खातिर,

कुदरत मतवाली से,

दुनिया की नजरो से,

रखी बचाई के,

मैया को ओढ़ाउंगी,

द्वारे पे जाइके।।

रिमझिम फुहारों की जब,

सावन रुत आएगी,

सखियों संग झूला झूलने,

मैया जब जाएगी,

झूले संग आसमान में,

चुनरी लहराइयेगी,

रह जाये इंद्रधनुष के,

रंग शरमाइके,

मैया को ओढ़ाउंगी,

द्वारे पे जाइके।।

मैया के मन भाएगी,

चुनरी निराली ये,

मुश्किल घडी में होगी,

मेरी रखवाली ये,

चुनरी के रंग में लख्खा,

जिंदगी रंगवाली ये,

चुनरी में मात सरल को,

रखना छुपाईके,

मैया को ओढ़ाउंगी,

द्वारे पे जाइके।।

जयपुर से लाई मैं तो,

चुनरी रंगवाई के,

गोटा किनारी अपने,

हाथो लगवाई के,

मैया को ओढ़ाउंगी,

द्वारे पे जाइके।।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।