अब मारी सुरता भजन मे लागी

पारंपरिक
अन्य भजन गुरुदेव भजन bhajan
॥ पावन पाठ ॥

( मूरख नै समझावतां, ग्यान गांठ रो जाय।

कोयलो हुवै न ऊजलो, सौ मण साबुण लाय।। )

सतगुरु मिलिया पागी ,

अब मारी सुरता भजन मे लागी।

जङी बूटी ओखद कारी ,

दवा दारू सब त्यागी।

तंतर मंतर जंतर सारा ,

लाजी बाजी हम त्यागी।

अब मारी सुरता भजन मे लागी।

सतगुरु मिलिया पागी….

पोती पुस्तक ज्योतक सारा ,

बाछ बाछ ने त्यागी।

तीर्थ व्रत नेम रा बधंन ,

सेवा पूजा हम त्यागी।

अब मारी सुरता भजन मे लागी।

सतगुरु मिलिया पागी….

कुदरत रा खेल कुदरत से होवे ,

मत भूलो बङभागी।

धीरे धीरे सब कुछ होवे ,

मन री कल्पना त्यागी।

अब मारी सुरता भजन मे लागी।

सतगुरु मिलिया पागी….

सतगुरु मिलिया संचय टलिया ,

भेद भ्रम सब भागी।

कहे हेमनाथ सुणो भाई संतों ,

निर्भय हुआ बङभागी।

अब मारी सुरता भजन मे लागी।

सतगुरु मिलिया पागी….

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।