ये जन्म तुझको बंदे मिला है

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॥ पावन पाठ ॥

ये जन्म तुझको बंदे मिला है जो लुटाने के काबिल नही है,

जो गुरु से किया था तूने वादा वो भुलाने के काबिल नही है।

सारे साधन है किस्मत बना ले भक्ति रंगत में जीवन रंगा ले,

बड़ी बाता ना तू रे बना रे ये बहाने के काबिल नहीं है।

जर्रे जर्रे में तू ही समाया आसमां बनके सृष्टि में छाया,

राज कोई भी उस राजदान से छिपाने के काबिल नहीं है।

रेत में कभी नईया चले ना,

काठ हंडिया में सब्जी गले ना,

जबतलक तेरा मनुआ झुके ना सर जुकाने के काबिल नहीं है।

मोह ममता की तारों को तोड़ो प्रेम सतगुरु के चरणों में जोड़ो,

हम मुसाफिर है दुनिया सरां है दिल लगाने के काबिल नही है।

ये जन्म तुझको बंदे मिला है जो लुटाने के काबिल नही है,

जो गुरु से किया था तूने वादा वो भुलाने के काबिल नही है।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।