मेरे सतगुरु जी तुमको मेरी हर धड़कन याद करें

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॥ पावन पाठ ॥

मेरे सतगुरु जी तुझको मेरी हर धड़कन याद करें,

इतना दिया तूनें प्यार,

नादान हूँ अन्जान हूँ ना कोई भी गुणं मुझमें फिर भी दिया तूनें प्यार.....

ना भक्ति ही जानूँ, ना मुक्ति कोई जानूँ,

मैं प्रीती करनें की, कोई रीति ना जानूँ,

तुमनें जो किरपा की हैं, दिया,शब्द का प्यारां नाम, बहुत किया उपकार,

मेरे सतगुरु जी तुझको, मेरी हर धड़कन याद करें,

इतना दिया तूनें प्यार.....

अच्छे करम ना किये, ना बन्दगी तेरी,

भरी गुनाहों सें, ये जिन्दगी मेरी,

तुमनें माफी दे दी हैं, मेरे कर्मों की सतगुरु, मैं था बड़ा गुनाहगार,

मेरे सतगुरु जी तुझको, मेरी हर धड़कन,याद करें,

इतना दिया तूनें प्यार.....

तेरे ही साये में, ये जिन्दगी गुजरें,

मेरी आखिरी साँसें, तेरी गोद में निकलें,

मेरी ये इक इक साँस हो, मेरे प्यारें सतगुरु जी,तेरी हैं करजदार,

मेरे सतगुरु जी तुझको, मेरी हर धड़कन,याद करें,

इतना दिया तूनें प्यार.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।